Posted by: YADAV WARRIORS | March 25, 2014

वीर राव सरदार सिंह(1947 में उड़ी-पुंछ के मोर्चे की लड़ाई )


हिंदुस्तान जिन्दाबाद —- 1947 में उड़ी-पुंछ के मोर्चे पर ये अन्तिम यलगार थी वीर राव सरदार सिंह जी की i वीर भूमि अहीरवाल के लाम्बा गोत्र के प्रसिद्ध ठीकाने “अचीना” के वीर यदुवंशी राव सरदार सिंह जी ने उस दिन अपने मुट्ठी भर अहीरों के साथ मिल कर 200 पाकिस्तानियों का अंतिम साँस तक मुकाबला किया था और नाम “अहीर” को रोशन किया था i ————- उस दिन यदुवीरों की एक टुकड़ी गाड़ियों में सवार हो कर मोर्चे पर जा रही थी कि अचानक दुश्मन ने घात लगा कर हमला बोल दिया , राव सरदार सिंह जी तुरंत गाडी से नीचे कूद गये लेकिन एक गोली उन के पैर में लग गयी i घायल अहीर शेर ने मोर्चा संभाल लिया , उनके साथी उन्हें इलाज़ के लिए हटाने लगे तो उन ने इंकार कर दिया और दुश्मन से लोहा लेते रहे i अचानक जब 200 पाकिस्तानियों का झुण्ड सामने आ गया तो ये वीर यदुवंशी अकेला ही स्टेन-गन से फायर करता हुआ उन से जूझ गया i और उनकी अंतिम यलगार “हिंदुस्तान जिंदाबाद” कश्मीर की वादियों में गूँज गयी —— रणबंका यदुवीर अपना क्षात्र-धर्म निभाते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ और इंद्रा-सभा में वीरों के आसन पर विराजमान हुए i उनकी इस असाधारण वीरता और बलिदान के लिए मरणोपरांत उन्हें “वीर चक्र” से नवाज़ा गया i ———————–ऐसी मर्द कौम क्या “अहीर रेजिमेंट” की हकदार नहीं है ? ———अब वक्त आ गया है , ये फैसला हो जाना चाहिए —– क्या तो सब की तोड़ दो या फिर हमारी भी जोड़ दो i————– अहीर रेजिमेंट जिंदाबाद i

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